Friday, September 4, 2020

Jai Jai Dutt Raaj Yogi

 जय जय दत्त राज योगी, जय जय महाराज योगी 


शैली श्रृंगी कंठा झोली विभूत लगाया तन मो 

कोटि चंद्र का तेज झुलत है चले अपने गति मो 


जय जय दत्त राज योगी, जय जय महाराज योगी 


शंख चक्र और त्रिशूल बिराजे गले पड़ी वनमाला 

जोग दंड अवधूत दिगम्बर बनारस रहने वाला 


जय जय दत्त राज योगी, जय जय महाराज योगी 


कृपा करो हम दीन रंक हैं ले जाओ अपनी माया 

महादेव सूत ध्यान धरत जब तब ही दर्शन पाया 


जय जय दत्त राज योगी, जय जय महाराज योगी 

Tuesday, August 25, 2020

Aao bhog lagao Mohan

आओ भोग लगाओ मोहन 


भीलनी के बेर सुदामा के तांदुल 

रूचि रूचि भोग लगाए मोहन 

आओ भोग लगाओ मोहन 


पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण 

चारों दिशा से आओ मोहन 

आओ भोग लगाओ मोहन 


यशोदा माता ने लोनी बिलोई 

माखन मिश्री खाओ मोहन 

आओ भोग लगाओ मोहन 


दुर्योधन के मेवा त्यागे 

साग विदुर घर खाये मोहन 

आओ भोग लगाओ मोहन 


जब जब पीर पडी भक्तन पर 

गरुड़ छोड़ कर आये मोहन 

आओ भोग लगाओ मोहन 


आप की वास्तु आप के आगे 

इस दासी का कुछ नहीं लागे 

आओ भोग लगाओ मोहन  


ये भजन मुझे आदरणीया ताई श्रीमती सोनाली कुलकर्णी (खंडवा) के माध्यम से ज्ञात हुआ | 

Guru Gyaan Kya kare!


रचना प्रभु की देख के ज्ञानी बड़े बड़े 

पाये न कोई पार तो नादान क्या करे 

जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे 


निज रूप को जाने नहीं पुराण क्या पढ़े 

करके दया दयालु ने मानव जनम दिया 

बंदा न करे भजन तो भगवान्  करे 

जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे 


सब जीव जंतुओं में जिसे है नहीं दया 

ब्रह्मानंद व्रत नियम पुण्य दान क्या करे 

जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे 


ये भजन मुझे आदरणीया मौसी श्रीमती आशा ठक्कर (इंदौर) एवं श्रीमती निशा शर्मा (खंडवा) के माध्यम से ज्ञात हुआ | 


Meri Suno Prabhuji jaise sabka dukh niwara!

 मेरी सुनो प्रभु जैसे सबका दुःख निवारा 


अजामील गणिका प्रहलाद को उबारा 

जनक जानकी की सोच धनुष तोड़ डाला 

मेरी सुनो प्रभु जैसे सबका दुःख निवारा 


विभीषण को शरण देत रावण को मारा 

भई ग्लानि आये शरण हारी प्रीति हारा  

मेरी सुनो प्रभु जैसे सबका दुःख निवारा 


अंत काम कोई न आये नज़र भर निहारा 

सती वृंदा को एक नाथ तेरा ही सहारा 

मेरी सुनो प्रभु जैसे सबका दुःख निवारा 


ये भजन मुझे आदरणीया मौसी श्रीमती आशा ठक्कर (इंदौर) एवं श्रीमती निशा शर्मा (खंडवा) के माध्यम से ज्ञात हुआ | 

Friday, June 5, 2020

Jachaki (Jaape) ke laddu banane ki vidhi

जचकी (जापे) के लड्डू 
प्रसव के पश्चात् नन्हे शिशु की माँ को जड़ी बूटी से बने लड्डू देना हमारी परंपरा है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण तो मेरे पास नहीं है किन्तु बुजुर्गों के लोक ज्ञान पर मुझे थोड़ा विश्वास है। इस कारण इस परंपरा को मैं लिख रहा हूँ जिससे ये ज्ञान खो न जाए। 

प्राय दवाई और मेवे को मिला के लड्डू बनाये जाते हैं।  किन्तु दवाई के स्वाद से पूरा लड्डु खाने में असुविधा होती है।  अतः दवाई के और मेवे के लड्डू अलग अलग बना कर सेवन किया जा सकता है।  

ये लड्डू प्रसव के बाद ११ -१२ दिन के पश्चात् देना आरम्भ कर सकते हैं।    

विधि 
साठवा सौंठ - १०० ग्राम 
कमरकस - १०० ग्राम 
धौली मूसली - १०० ग्राम 
मांजू फल - १ नग 
वयवडिंग - ५ ग्राम 
वैपुम्बा - ५ ग्राम 
जावित्री - ५ ग्राम 
लेंडी पिप्पल - ५ ग्राम 
अजवाइन - १ छोटी चम्मच 

१. ऊपर दी गयी सभी वस्तुओ को पीस (हाथ से कूट कर ) उसका पाउडर बना लेवें। 

२. तत्पश्चात गोंद - (२५० ग्राम) को घी में सेक के फुला के रख लेवें। 

३. ५०० ग्राम गुड़ को धीमे आँच पे पिघला के उसमे ५०० ग्राम घी दाल के समरस मिश्रण बनाएं। उसमे फुला हुआ गोंद और दवाइयों का हाथ से कूटा हुआ पाउडर मिला के छोटी छोटी १०-११ गोलियां बना लें। घी और गुड़ स्वाद के अनुसार और मिलाये जा सकते हैं  

खाने की विधि 
सुबह खाली पेट एक गोली खा के गरम दूध पियें। 
उसके बाद सूखे मेवे के लड्डू खा सकते हैं।  

परहेज 
खटाई (निम्बू, दही ), एवं वात कारक पदार्थ जैसे चना, दाल आदि का सेवन न करें. 
यदि दवाई ८ दिन लें तो परहेज दो गुना अर्थात १६ दिन का करना है 

ये विधि मुझे हमारी बुआ आदरणीया गायत्री जोशीजी (इंदौर ) के माध्यम से ज्ञात हुयी.