रचना प्रभु की देख के ज्ञानी बड़े बड़े
पाये न कोई पार तो नादान क्या करे
जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे
निज रूप को जाने नहीं पुराण क्या पढ़े
करके दया दयालु ने मानव जनम दिया
बंदा न करे भजन तो भगवान् करे
जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे
सब जीव जंतुओं में जिसे है नहीं दया
ब्रह्मानंद व्रत नियम पुण्य दान क्या करे
जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करे
ये भजन मुझे आदरणीया मौसी श्रीमती आशा ठक्कर (इंदौर) एवं श्रीमती निशा शर्मा (खंडवा) के माध्यम से ज्ञात हुआ |
No comments:
Post a Comment