आओ भोग लगाओ मोहन
भीलनी के बेर सुदामा के तांदुल
रूचि रूचि भोग लगाए मोहन
आओ भोग लगाओ मोहन
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण
चारों दिशा से आओ मोहन
आओ भोग लगाओ मोहन
यशोदा माता ने लोनी बिलोई
माखन मिश्री खाओ मोहन
आओ भोग लगाओ मोहन
दुर्योधन के मेवा त्यागे
साग विदुर घर खाये मोहन
आओ भोग लगाओ मोहन
जब जब पीर पडी भक्तन पर
गरुड़ छोड़ कर आये मोहन
आओ भोग लगाओ मोहन
आप की वास्तु आप के आगे
इस दासी का कुछ नहीं लागे
आओ भोग लगाओ मोहन
ये भजन मुझे आदरणीया ताई श्रीमती सोनाली कुलकर्णी (खंडवा) के माध्यम से ज्ञात हुआ |