Friday, June 5, 2020

Jachaki (Jaape) ke laddu banane ki vidhi

जचकी (जापे) के लड्डू 
प्रसव के पश्चात् नन्हे शिशु की माँ को जड़ी बूटी से बने लड्डू देना हमारी परंपरा है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण तो मेरे पास नहीं है किन्तु बुजुर्गों के लोक ज्ञान पर मुझे थोड़ा विश्वास है। इस कारण इस परंपरा को मैं लिख रहा हूँ जिससे ये ज्ञान खो न जाए। 

प्राय दवाई और मेवे को मिला के लड्डू बनाये जाते हैं।  किन्तु दवाई के स्वाद से पूरा लड्डु खाने में असुविधा होती है।  अतः दवाई के और मेवे के लड्डू अलग अलग बना कर सेवन किया जा सकता है।  

ये लड्डू प्रसव के बाद ११ -१२ दिन के पश्चात् देना आरम्भ कर सकते हैं।    

विधि 
साठवा सौंठ - १०० ग्राम 
कमरकस - १०० ग्राम 
धौली मूसली - १०० ग्राम 
मांजू फल - १ नग 
वयवडिंग - ५ ग्राम 
वैपुम्बा - ५ ग्राम 
जावित्री - ५ ग्राम 
लेंडी पिप्पल - ५ ग्राम 
अजवाइन - १ छोटी चम्मच 

१. ऊपर दी गयी सभी वस्तुओ को पीस (हाथ से कूट कर ) उसका पाउडर बना लेवें। 

२. तत्पश्चात गोंद - (२५० ग्राम) को घी में सेक के फुला के रख लेवें। 

३. ५०० ग्राम गुड़ को धीमे आँच पे पिघला के उसमे ५०० ग्राम घी दाल के समरस मिश्रण बनाएं। उसमे फुला हुआ गोंद और दवाइयों का हाथ से कूटा हुआ पाउडर मिला के छोटी छोटी १०-११ गोलियां बना लें। घी और गुड़ स्वाद के अनुसार और मिलाये जा सकते हैं  

खाने की विधि 
सुबह खाली पेट एक गोली खा के गरम दूध पियें। 
उसके बाद सूखे मेवे के लड्डू खा सकते हैं।  

परहेज 
खटाई (निम्बू, दही ), एवं वात कारक पदार्थ जैसे चना, दाल आदि का सेवन न करें. 
यदि दवाई ८ दिन लें तो परहेज दो गुना अर्थात १६ दिन का करना है 

ये विधि मुझे हमारी बुआ आदरणीया गायत्री जोशीजी (इंदौर ) के माध्यम से ज्ञात हुयी. 
 

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